प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य

गांव की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति की कल्पना बिना अच्छी सड़कों के करना संभव नहीं है। इसलिये आवश्यक है कि प्रत्येक गांव को बारामासी सड़कों से जोड़ा जावे। अतः भारत सरकार द्वारा 25.12.2000 को ’’प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’’ इस उद्देश्य के साथ प्रारंभ की गई थी कि ‘‘सामान्य क्षेत्रों में 500 तथा आदिवासी क्षेत्र एवं आई.ए.पी. जिलों में 250 या इससे अधिक आबादी की समस्त बिना जुड़ी हुई बसाहटों को अच्छी बारहमासी सड़कों से जोड़ा जाना है‘‘। ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा 09 अप्रैल 2014 को नक्सल प्रभावित 07 जिलों के 29 विकासखण्डों का चयन करते हुए इन विकासखण्डों में 100 से 249 जनसंख्या वाली बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने हेतु सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हुयी एवं कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। प्रारंभिक अनुमानों के आधार पर वर्ष 2002 में मास्टरप्लान तैयार करने पर छत्तीसगढ राज्य में कुल 27622 बसाहटें चिन्हित की गयी, इसमें से 12178 बसाहटें इस योजना के लिए पात्र थी।


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की विशेषता -
  • योजना के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण कार्यरत हैं, जो छत्तीसगढ़ सोसायटी राजिस्ट्रीकरण अधिनियिम 19 के अंतर्गत एक पंजीकृत संस्था है। इस अभिकरण के मुख्यालय प्रमुख मुख्य कार्यपालन अधिकारी है एवं उनके अधीनस्थ 05 मुख्य अभियंता तथा अन्य अमला पदस्थ हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय स्तर पर 8 मंडल कार्यालय एवं जिला स्तर पर 37 समर्पित परियोजना क्रियान्वयन इकाई कार्यरत् हैं।
  • गुणवत्ता नियंत्रण हेतु त्रिस्तरीय व्यवस्था की गयी है। (i) प्रथम स्तर (जिला स्तर) पर परियोजना क्रियान्वयन इकाई इसके लिए जवाबदेह हैं। (ii) द्वितीय स्तर (राज्य स्तर) पर स्वतंत्र रुप से राज्य गुणवत्ता समीक्षक नियुक्त किया जाकर कार्यों का निरीक्षण किया जाता है। (iii) तृतीय स्तर (राष्ट्रीय स्तर) पर भारत सरकार द्वारा स्वतंत्र समीक्षा हेतु राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षक को योजना के कार्यो के निरीक्षण हेतु भेजा जाता है।
  • प्रत्येक सड़क का राज्य गुणवत्ता समीक्षक द्वारा कम से कम तीन बार निरीक्षण करना अनिवार्य है। सिर्फ ऐसी सड़के जिनकी गुणवत्ता मानक स्तर की हो, को ही मान्य किया जाता है।
  • भारत सरकार द्वारा भेजे जा रहे राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षकों के द्वारा किये गये निरीक्षणों में राज्य की सड़कों की गुणवत्ता बहुत अच्छी पायी गयी। वर्तमान में असंतोषप्रद सड़कों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है।
  • प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय सामग्री परीक्षण प्रयोग शालाएं भी स्थापित की गयी हैं। राज्य स्तर पर केन्द्रीय प्रयोगशाला स्थापित हैं तथा 34 चलित सामग्री परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा नियमित रुप से सड़कों की गुणवत्ता का परीक्षण किया जा रहा हैं।
  • कार्यक्रम की प्रभावी समीक्षा के लिए आन-लाइन प्रबंधन और मानीटरिंग प्रणाली तैयार की गई है। इस हेतु नियमित रुप से परियोजना क्रियान्वयन इकाईयों द्वारा अद्यतन आंकड़ों एवं फोटोग्राफ्स् की प्रविष्टि की जाती है।
  • वेबसाईट www.pmgsy.nic.in एवं www.pmgsyonline.nic.in पर सड़क कार्य की तस्वीरें और वीडियो क्लिप्स नियमित तौर पर डाली जा रही है।
  • भारत सरकार द्वारा सामान्य जन हेतु मोबाईल एप ‘‘मेरी सड़क‘‘ दिनांक 25 दिसम्बर 2015 से प्रारंभ की गई हैं, जिसमें योजना अंतर्गत सड़क के संबंध में शिकायत दर्ज कराई जा सकती हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत प्राथमिकता का निर्धारण -

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत प्राथमिकता का निर्धारण निम्नानुसार किया जावेगा -

  • प्रथम प्राथमिकता - सभी 1000 या उससे अधिक आबादी की बसाहटों (आदिवासी तथा पहाड़ी क्षेत्र की स्थिति में 500 या उससे अधिक आबादी की बसाहटों) को बारामासी मार्ग से जोड़नें का कार्य
  • दूसरी प्राथमिकता - सभी 500 या उससे अधिक आबादी की बसाहटें (आदिवासी तथा पहाड़ी एवं आईएपी जिलों में क्षेत्र की स्थिति में 250 या उससे अधिक आबादी की बसाहटें) को बारामासी मार्ग से जोड़ने हेतु नई सड़क निर्माण
  • तीसरी प्राथमिकता - सभी मुख्य मार्गों (Through Routes) का उन्नयन
  • चौथी प्राथमिकता - सभी संपर्क मार्ग (Link Routes) का उन्नयन

सड़कों की स्वीकृति की प्रक्रिया -
  • प्राथमिकता क्रम के निर्धारण के उपरांत परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत के अनुमोदन के बाद छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को भेजा जावेगा। छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण प्रस्ताव का पुनरीक्षण करेगी। प्रस्ताव दिशा-निर्देशों के अनुरुप होने पर राज्य स्तरीय स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
  • राज्य स्तरीय स्थायी समिति के द्वारा संविक्षा के बाद परियोजना क्रियान्वयन इकाई सड़कों का सर्वेक्षण कर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाकर राज्य तकनीकी एजेंसी से अनुमोदन कराया जावेगा।
  • राज्य तकनीकी एजेंसी से अनुमोदन पश्चात् स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाता हैं।
  • भारत सरकार स्तर पर सचिव, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की अध्यक्षता में गठित सशक्त समिति प्रस्तावों का अनुमोदन करती है।
  • सड़कों की स्वीकृति प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण द्वारा आनलाईन निविदा आमंत्रित कर ठेकेदारों की नियुक्ति की जाती है।